10/12/15

वो हमारे पास एक अनाथ बच्चे को गोद लेने आए थे!



एक बेटा अपने बूढ़े पिता को वृद्धाश्रम एवं अनाथालय में छोड़कर वापस लौट रहा था;

उसकी पत्नी ने उसे यह सुनिश्चत करने के लिए फोन किया कि पिता त्योहार वगैरह की छुट्टी में भी वहीं रहें घर ना चले आया करें !

बेटा पलट के गया तो पाया कि उसके पिता वृद्धाश्रम के प्रमुख के साथ ऐसे घलमिल कर बात कर रहे हैं जैसे बहुत पुराने और प्रगाढ़ सम्बंध हों...

तभी उसके पिता अपने कमरे की व्यवस्था देखने के लिए वहाँ से चले गए.. अपनी उत्सुकता शांत करने के लिए बेटे ने अनाथालय प्रमुख से पूँछ ही लिया...

"आप मेरे पिता को कब से जानते हैं ? "

मुस्कुराते हुए वृद्ध ने जवाब दिया...

"पिछले तीस साल से...जब वो हमारे पास एक अनाथ बच्चे को गोद लेने आए थे! "

इन बातों में छुपी है रिश्ते की खुशहाली

जब वक्त बहुत कम रहता है तो रिश्ते प्रभावित होने लगते हैं। पर ऐसा कभी होना नहीं चाहिए, क्योंकि आपकी सफलता के पीछे इन्हीं लोगों का हाथ है। कैसे तमाम व्यस्तताओं के बीच अपने रिश्तों के लिए वक्त निकालें, बता रही हैं विनीता झा

खुशियों भरी जिंदगी वही होती है, जहां सारे रिश्ते खुशनुमा होते हैं। अगर आपके पास जिंदगी की सारी खुशियां हैं, पर उन खुशियों को बांटने के लिए कोई नहीं तो फिर ऐसी खुशी का क्या फायदा! पौधों की तरह ही रिश्तों की ताजगी बरकरार रखने के लिए उनकी नियमित देखभाल जरूरी होती है। यह देखभाल, अपनों के लिए वक्त निकाले बिना संभव नहीं। माना कि आप बेहद व्यस्त जिंदगी जीती हैं। आठ घंटे की नींद लिए अरसा बीत गया है। आपके पास अपनी जरूरतों के लिए भी वक्त नहीं है। इन सब कारणों के बावजूद अगर आप खुशनुमा जिंदगी जीना चाहती हैं तो आपको अपने परिवार और दोस्तों के लिए वक्त निकालने की कला सीखनी ही होगी। 
सुबह जल्दी उठें
जब आप सुबह जल्दी उठती हैं तो आपके पास काम करने और दूसरों के साथ बात करने का अधिक वक्त मिल जाता है। वीकएंड में दोपहर तक सोते रहने के बजाय आप अपने दिन की शुरुआत अपने घर के सदस्यों के साथ कुछ वक्त बिताकर कर सकती हैं। अपने परिवार के साथ सुबह-सुबह कुछ वक्त बिताकर आप न सिर्फ दिन भर की चुनौतियों के लिए खुद को बेहतर तरीके से तैयार कर पाएंगी, बल्कि यह भी जान पाएंगी कि उन लोगों की जिंदगी में आजकल क्या हो रहा है। 

अच्छे वक्त बिना, न गुजरे कोई दिन

अपनी मां को फोन बाद में कर लूंगी। जिंदगी और रिश्तों के प्रति अगर आपका यह रवैया है तो इसे जल्द-से-जल्द बदल डालें। यदि आपके पास अभी वक्त है, तो उसका इस्तेमाल अपने रिश्ते को रिफ्रेश करने में करें। आपको अंदाजा नहीं है कि आपके इस प्रयास का आपकी जिंदगी पर कितना अच्छा असर पड़ेगा। हमेशा आपका कोई दोस्त आपसे यह पूछता है कि हम कब मिल रहे हैं, तो फुर्सत मिलने के साथ ही उसके साथ डिनर का कार्यक्रम बनाएं। खासतौर पर दोस्तों के साथ इस मेल-मुलाकात को टालते न रहें, क्योंकि हो सकता है कि अपने इस रवैये के कारण आप अपने दोस्तों के लिए कभी वक्त निकाल ही न पाएं। 

ऑफिस का काम न लाएं घर

अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ ज्यादा वक्त नहीं बिता पाने का एक और कारण है कि ऑफिस का काम घर लाना। हालांकि कई बार यह बहुत जरूरी हो जाता है। लेकिन यदि आप ऑफिस में ही यथासंभव अपना काम निपटा देती हैं तो घर पर आपको ज्यादा से ज्यादा खाली वक्त मिल जाएगा। अगर आप यह तय कर लें कि ऑफिस का काम घर नहीं लाना है तो सच में आप अपने लक्ष्य को हासिल कर पाएंगी। बस, तय करने भर की जरूरत है।

काम में हाथ बंटाएं

अपनी दुनिया में सिमटने के बजाय जब आप काम में उलझी रहें तो परिजनों को भी हाथ बंटाने की इजाजत दें। अपने करीबी लोगों को भी जब हम अपना काम करने का मौका देते हैं तो उन्हें लगता है कि वे हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। ठीक इसी तरह जरूरत पड़ने पर उनके काम में भी हाथ बटाएं। आप अपने परिवार का खयाल रखती हैं, यह जताने के लिए यह एक अच्छा तरीका है। 

सोते वक्त साथ समय बिताएं

रात में जब पूरा परिवार काम कर रहा हो, उस समय ऑफिस का काम करने से भले ही ऑफिस में आपको जल्दी प्रमोशन मिल जाए, पर इससे जीवनसाथी के साथ आपका संबंध प्रभावित हो सकता है। यदि आप अभिभावक हैं और बच्चों के सोने के बाद घर आती हैं तो धीरे-धीरे बच्चे आपसे दूर होने लगेंगे। ऐसे ही यदि आप अपने जीवनसाथी के सोने के बाद ऑफिस ेसे घर लौटती हैं, तो धीरे-धीरे आप दोनों के बीच का रिश्ता कमजोर हो सकता है। परिवार के सोने से पहले घर पहुंचने से आपकी सोच से कहीं ज्यादा आपके रिश्तों की मधुरता बढ़ सकती है। रिश्ते की मधुरता के लिए आपकी उपस्थिति काफी मायने रखती है।
(मनोविशेषज्ञ डॉ़ ज्योति कपूर मदान से बातचीत पर आधारित)

SOURCE - HINDUSTAN

पहला कदम ही इसान को आखिरी कदम तक लेकर जाता है


अपने समय के महान वैज्ञानिक थॉमस बहुत ही मेहनती इंसान थे।बचपन में उन्हें यह कहकर स्कूल से निकाल दिया गया कि वह मंद बुद्धि बालक है। उसी थॉमस एडिसन ने कई महत्वपूर्ण आविष्कार किए जिसमें से बिजली का बल्ब प्रमुख है।उन्होंने बल्ब का आविष्कार करने के लिए हजारों बार प्रयोग किए थे।तब जाकर उन्हें सफलता मिली थी।एक बार जब वह बल्ब बनाने के लिए कोई प्रयोग कर रहे थे। तभी एक व्यक्ति ने उनसे पूछा आपने करीब एक हजार प्रयोग किए,लेकिन आपके सारे प्रयोग असफल रहे। साथ ही, आपकी मेहनत बेकार हो गई

एडिसन ने कहा मैं सोचता हूं कि मेरे एक हजार प्रयोग असफल हुए है। मेरी मेह। क्या आपको दुःख नहीं होता है।नत बेकार नहीं गई, क्योंकि मैंने एक हजार प्रयोग करके यह पता लगाया है कि इन एक हजार तरीकों से बल्ब नहीं बनाया जा सकता। मेरा हर प्रयोग, बल्ब बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है और मैं अपनी हर कोशिश के साथ एक कदम आगे बढ़ता हूं। कोई भी सामान्य व्यक्ति होता तो वह जल्द ही हार मान लेता, लेकिन थॉमस एडिसन ने अपने प्रयास जारी रखे और हार नहीं मानी। आखिरकार एडिसन की मेहनत रंग लाई और उन्होंने बल्ब का आविष्कार करके पूरी दुनिया को रोशन कर दिया। यह थॉमस एडिसन का विश्वास ही था जिसने आशा की किरण को बुझने नहीं दिया और पूरी दुनिया को बल्ब देकर रोशन कर दिया।


सीख: 1. किसी दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम ही इसान को सफलता तक ले जाता है।

2. असफलता से न डरने वाले को ही सफलता मिलती है।


source - bhasker